उद्देश्य

श्री रामायण वैदिक एजुकेशन फाउंडेशन की गतिविधियों का एक उद्देश्य यह रहा था कि सनातन धर्म के आदर्शों से प्रेरित होकर उत्तम उदाहरण के रूप में मानवों के जीवन में प्रशिक्षण, उत्थान, आध्यात्मिक उन्नयन, शैक्षिक और चारित्रिक विकास करना। तभी मानव की उन्नति की प्रक्रिया को सफल बनाया जा सके। इस संस्था के माध्यम से विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं, जिनके द्वारा समाज अपनी क्षमताओं का समुचित रूप से प्रयोग करते हुए परिवार, समाज और राष्ट्र में पुनः सदाचार, सहयोग, सेवा, समर्पण की भावना को विकसित कर सके। इसके लिए विभिन्न प्रकार के आध्यात्मिक संस्कार, सत्संग, प्रवचन तथा कार्यशालाओं के आयोजन के माध्यम से विद्या का प्रचार-प्रसार किया जाता है। इसके लिए विद्वान संत-पुरुषों, विदुषी महिलाओं तथा अन्य सामाजिक सहयोगियों को आमंत्रित किया जाता है। प्रमुख कार्यक्रम / कार्य 1. पुस्तक एवं पुस्तकालय प्रकाशन कार्य इसमें प्रमुख वैदिक, आध्यात्मिक विषयों का संकलन कर उन्हें समाचार पत्र, इंटरनेट माध्यम एवं सोशल मीडिया के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। 2. कला एवं संस्कार कार्य इसके अंतर्गत नृत्य एवं अन्य महत्वपूर्ण कला गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है। जैसे — चित्रकला (पेंटिंग), रंगोली, चित्रकारी आदि के माध्यम से वैदिक विचारों का प्रसार किया जाता है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों में नैतिक संस्कार, स्वावलंबन, जीवन का अनुशासन और सेवा की भावना को विकसित करने का प्रयास किया जाता है। 3. शिक्षा एवं संस्कार कार्यक्रम शिक्षा के क्षेत्र में आयु के अनुसार पाठ्य-पुस्तकों का वितरण, शिक्षा के प्रति उत्साह जगाने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएँ, संगोष्ठियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा समय-समय पर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है।

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